नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे 'विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-जजों की पीठ ने आदेश दिया है कि उन 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए जाएं जिनके विवरण में 'तार्किक विसंगतियां' (logical discrepancies) पाई गई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन नामों की सूची प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में प्रदर्शित की जानी चाहिए ताकि प्रभावित लोगों को इसकी तुरंत जानकारी मिल सके। Supreme Court underlined that the ongoing verification process has caused significant "stress" among the people of West Bengal, making it essential for the ECI to ensure complete transparency and convenience for the voters.
सुनवाई के दौरान अदालत ने गौर किया कि लगभग 2 करोड़ लोगों को दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें से सवा करोड़ लोग 'तार्किक विसंगति' की श्रेणी में हैं। इस श्रेणी में मुख्य रूप से पिता या माता-पिता के नाम में मिलान न होना, उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना और दादा-दादी की उम्र में विसंगतियां शामिल हैं। The bench, which also included Justices Dipankar Datta and Joymalya Bagchi, directed the ECI to allow affected voters to submit their documents through authorized representatives like Booth Level Agents (BLAs) to minimize their hardship. इसके साथ ही, अदालत ने 10 दिनों का अतिरिक्त समय देने का निर्देश दिया है ताकि जो लोग अब तक अपनी आपत्तियां दर्ज नहीं करा पाए हैं, वे ऐसा कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से निर्देश जारी करने की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि सभी निर्देश आधिकारिक सर्कुलर के जरिए दिए जाने चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह सत्यापन केंद्रों पर पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध कराए और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। The court noted that in states like Bihar, initial apprehensions about large-scale deletions were high, but the final numbers significantly dropped after proper verification. अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम तकनीकी खामियों के कारण न कटे।