नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। शास्त्रों की मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन स्वयं देवता स्वर्ग लोक से उतरकर धरती पर आते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य और चंद्रमा के आमने-सामने होने से 'समसप्तक राजयोग' का निर्माण हो रहा है, जो जल तत्व और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर किया गया जप, तप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 1 फरवरी 2026, रविवार को सुबह 5:52 बजे होगा और समापन 2 फरवरी को सुबह 3:38 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, सभी धार्मिक अनुष्ठान 1 फरवरी को ही संपन्न होंगे। इस पावन अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:24 से 6:17 तक) में स्नान करना सर्वोत्तम माना गया है। इसके अतिरिक्त, इस बार रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और आयुष्मान योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ हैं।
माघ पूर्णिमा की पूजा विधि में सूर्य देव को अर्घ्य देना और भगवान श्रीहरि विष्णु के 'ॐ नमो नारायण' मंत्र का जाप करना मुख्य है। इस दिन काले तिल से पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, रात्रि में माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने से आर्थिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन प्रयागराज के संगम में या गंगा जी में आस्था की डुबकी लगाते हैं, उनके जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।