नई दिल्ली: इंटरनेट की दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है, जिसने करोड़ों यूजर्स की रातों की नींद उड़ा दी है। मशहूर सिक्योरिटी एनालिस्ट जेरेमिया फाउलर की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.9 करोड़ (149 मिलियन) यूनिक यूजर आईडी और पासवर्ड एक असुरक्षित डेटाबेस के माध्यम से लीक हो गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह विशाल डेटाबेस बिना किसी सुरक्षा या इंक्रिप्शन के इंटरनेट पर खुलेआम उपलब्ध था। इसमें दुनिया के लगभग हर बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म का डेटा शामिल है, जिससे व्यक्तिगत और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। The Massive Data Breach involving 149 Million Accounts has exposed sensitive login credentials across global platforms like Gmail and Facebook.
लीक हुए आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सबसे बड़ा प्रहार ईमेल सेवाओं पर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 4.8 करोड़ Gmail अकाउंट्स, 40 लाख याहू और 15 लाख आउटलुक अकाउंट्स की जानकारी सार्वजनिक हो गई है। सोशल मीडिया के मोर्चे पर फेसबुक के 1.7 करोड़ और इंस्टाग्राम के 65 लाख अकाउंट्स प्रभावित हुए हैं। मनोरंजन के शौकीनों के लिए भी बुरी खबर है, क्योंकि Netflix के 34 लाख अकाउंट्स के साथ-साथ डिज्नी प्लस और एचबीओ मैक्स का डेटा भी इस चोरी का हिस्सा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें 4.2 लाख वित्तीय और सरकारी अकाउंट्स की लॉगइन डिटेल्स भी शामिल हैं, जिसका उपयोग साइबर अपराधी बैंकिंग धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। The exposure of Financial and Government Accounts alongside entertainment profiles highlights the alarming scale of this cyber incident.
विशेषज्ञों ने इस महा-चोरी के पीछे 'InfoStealer' नाम के एक खतरनाक मैलवेयर को जिम्मेदार ठहराया है। यह सॉफ्टवेयर चुपके से यूजर्स के डिवाइस में घुसकर बैकग्राउंड में पासवर्ड और संवेदनशील जानकारी चुरा लेता है। फाउलर ने खुलासा किया कि साइबर अपराधियों ने चोरी किया गया यह डेटा क्लाउड पर स्टोर किया था, लेकिन उनकी अपनी सुरक्षा में चूक के कारण यह डेटाबेस खुद ही लीक हो गया। बचाव के लिए साइबर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यूजर्स तुरंत अपने पासवर्ड बदलें और कम से कम 12-16 अंकों का जटिल पासवर्ड रखें। इसके साथ ही, हर अकाउंट पर Two-Step Verification (2SV) को सक्रिय करना अनिवार्य है ताकि पासवर्ड लीक होने की स्थिति में भी आपका अकाउंट सुरक्षित रहे। Implementation of Multi-Factor Authentication is now a critical necessity to protect digital identities from such infostealer malware attacks.