उज्जैन में बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी: एनजीटी के आदेश पर सप्तसागर की 18 बीघा जमीन होगी अतिक्रमण मुक्त



उज्जैन: सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के बीच उज्जैन के पौराणिक सप्तसागरों के अस्तित्व को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। ट्रिब्यूनल ने उज्जैन कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को सीधे निर्देश दिए हैं कि वे 18 बीघा जमीन पर फैले अवैध कब्जों को तुरंत खाली कराएं। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों के पालन में ईमानदारी की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इन तालाबों में सीवेज मिलने और अवैध निर्माण की पुष्टि होने के बाद अब प्रशासन को दो हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करनी होगी। The NGT Mandate for clearing encroachments around Ujjain's Holy Lakes highlights a major administrative push before the upcoming Simhastha.

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, गोवर्धन सागर के नाम से दर्ज खसरा संख्या 1281 की कुल 36 बीघा जमीन में से आधी यानी 18 बीघा जमीन पर भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों का नियंत्रण है। प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सेंट्रल जोन बेंच ने पाया कि अगस्त 2024 के आदेशों के बावजूद स्थानीय प्रशासन ने न तो अतिक्रमण हटाए और न ही शिप्रा नदी में सीवेज का मिलना बंद हो पाया। ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को पूरी निगरानी का जिम्मा सौंपा है। यह कार्रवाई रुद्रसागर, क्षीरसागर और विष्णुसागर जैसे पौराणिक जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। The 18 Bigha Land Clearance is expected to restore the original catchment areas of the Sapta Sagar network.

आगामी 20 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जिला प्रशासन को बड़े पैमाने पर बुलडोजर चलाकर इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना होगा। मुख्यमंत्री के प्राथमिक एजेंडे में शामिल शिप्रा शुद्धिकरण अभियान के तहत इन तालाबों की सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया जाना है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने एनजीटी के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इन जल स्रोतों की दुर्दशा से उज्जैन की पौराणिक विरासत खतरे में थी। अब मुख्य सचिव की सीधी निगरानी में होने वाली इस Bulldozer Action से शहर के भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। This judicial intervention aims to protect the Ecological and Religious Heritage of Ujjain from rapid urban encroachment.



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