पाकिस्तान का आर्थिक संकट: कर्ज चुकाने के लिए औने-पौने दाम पर सरकारी कंपनियां बेचने की तैयारी, PIA और के-इलेक्ट्रिक बने विफलता के प्रतीक



इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक दौर से गुजर रहा है, जहाँ सरकारी कंपनियों (SOEs) का बढ़ता घाटा और कर्ज का बोझ देश की अर्थव्यवस्था को डूबने की कगार पर ले आया है। 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) जैसी दिग्गज कंपनियां अब रणनीतिक सुधारों के बजाय केवल प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए बेची जा रही हैं। दशकों के राजनीतिक हस्तक्षेप, अतिरिक्त नियुक्तियों और कमजोर जवाबदेही ने इन संस्थानों को सफेद हाथी बना दिया है। हालत यह है कि ये कंपनियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमतों पर अपनी सेवाएं बेचने को मजबूर हैं, जिससे पब्लिक फंड का भारी नुकसान हो रहा है।

The privatization process in Pakistan is often seen as a desperate 'fire sale' rather than a well-planned economic reform. पीआईए (PIA) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो कभी क्षेत्र की प्रमुख एयरलाइन थी, लेकिन अब अरबों रुपये के बेलआउट पैकेज के बाद भी बंद होने की कगार पर है। विशेषज्ञों का तर्क है कि निजीकरण के बाद अक्सर मुनाफ़ा निजी हाथों में चला जाता है, जबकि कर्ज और पेंशन जैसी देनदारियों का बोझ जनता की जेब पर ही रहता है। पीटीसीएल (PTCL) के मामले में तकनीकी सुधार तो हुए, लेकिन हजारों कर्मचारी आज भी अपने कानूनी अधिकारों और पेंशन के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, जो पाकिस्तान के निजीकरण मॉडल की गहरी खामियों को उजागर करता है।

One of the biggest myths being debunked in the Pakistani economy is that privatization leads to lower consumer prices. 'के-इलेक्ट्रिक' (K-Electric) का उदाहरण सबके सामने है; निजीकरण के बावजूद पाकिस्तान में बिजली की दरें ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे आम आदमी का जीवन दूभर हो गया है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जब तक पाकिस्तान अपने शासन (Governance) और संस्थागत जवाबदेही में सुधार नहीं करता, तब तक सरकारी कंपनियों को बेचना केवल एक अस्थायी समाधान साबित होगा। वर्तमान में, पाकिस्तान अपने विदेशी कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए भारी दबाव में है, जिससे उसे अपनी बेशकीमती राष्ट्रीय संपत्तियों को निजी निवेशकों को सौंपने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।



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