संसद का बजट सत्र: मनरेगा की जगह नए कानून और SIR मुद्दे पर संग्राम की तैयारी, विपक्ष ने घेराबंदी के लिए कसी कमर



नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र बुधवार, 28 जनवरी 2026 से शुरू होने जा रहा है, जिसके शुरुआती दिनों से ही हंगामेदार रहने के आसार हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू होने वाले इस सत्र से पहले मंगलवार को सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस बार मनरेगा (MGNREGA) को खत्म कर लाए गए नए कानून 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी VB-G RAM G और चुनाव आयोग के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) जैसे मुद्दों पर सरकार को कोई रियायत नहीं देंगे। The Budget Session 2026 is set to be a battlefield over the transition from MGNREGA to the new employment act and concerns regarding electoral roll revisions.

विपक्ष के लिए सबसे बड़ा मुद्दा मनरेगा का नाम बदलना और इसके मूल स्वरूप में बदलाव करना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनके आदर्शों का अपमान किया है। विपक्ष का तर्क है कि नए कानून के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा (फंडिंग का अनुपात 90:10 से बदलकर 60:40 होने की आशंका) और ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होगी। वहीं, SIR (Special Intensive Revision) का मुद्दा भी गर्माया हुआ है, जिसे लेकर विपक्ष का दावा है कि पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। The Opposition Strategy focuses on reclaiming the rights-based structure of rural employment while questioning the intent behind intensive voter list updates.

सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि वे नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं। हालांकि, सरकार ने मनरेगा में बदलाव को 'सुधार' बताते हुए कहा कि VB-G RAM G Act भ्रष्टाचार को रोकने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जरूरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी (रविवार) को अपना नौवां लगातार बजट पेश करेंगी, जिससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 29 जनवरी को पटल पर रखा जाएगा। इस सत्र में अमेरिकी टैरिफ, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट और बढ़ते वायु प्रदूषण जैसे वैश्विक व स्थानीय आर्थिक मुद्दों पर भी तीखी बहस होना तय है। The Union Budget 2026 will be presented amid global economic shifts and intense domestic scrutiny of the government's legislative agenda.



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