चंडीगढ़/जालंधर: पंजाब में 'हिंद समाचार ग्रुप' (पंजाब केसरी/जगबानी) के खिलाफ आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की हालिया कार्रवाई ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। भाजपा, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने एक सुर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल पर "अघोषित आपातकाल" लगाने का आरोप जड़ा है। भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने इसे लोकतंत्र की नींव पर हमला करार दिया है, वहीं सुनील जाखड़ ने जालंधर और बठिंडा स्थित प्रेसों पर पुलिस की मौजूदगी को "सरकारी गुंडागर्दी" बताया। जाखड़ ने ऐलान किया है कि पंजाब में बिगड़ते हालात और प्रेस की स्वतंत्रता के हनन को लेकर भाजपा का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 17 जनवरी को पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात करेगा।
The political outcry reached a peak as leaders compared CM Bhagwant Mann’s actions to the 1975 Emergency, with Sukhbir Singh Badal stating that the government is targeting the media out of fear of losing power. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि जिस संस्थान ने आतंकवाद के दौर में गोलियां खाकर भी सच लिखना नहीं छोड़ा, उसे आज छापेमारी और डराने-धमकाने की राजनीति से झुकाया नहीं जा सकता। भाजपा महासचिव तरुण चुघ और डॉ. सुभाष शर्मा ने चेतावनी दी कि जैसे 1977 में जनता ने तानाशाही को उखाड़ फेंका था, वैसे ही 2027 में पंजाब की जनता इस दमनकारी सरकार को जवाब देगी। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि पत्रकारों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करना और बिजली आपूर्ति काटना केवल सच को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है।
Former CM Charanjit Singh Channi also joined the chorus, accusing the AAP government of misusing state machinery to silence critical voices, starting from the 'Ajit' group to independent YouTubers and now 'Punjab Kesari'. चन्नी ने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़ है और इसे पुलिस राज में तब्दील करना संवैधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है। भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि "जब समय मारता है तो आदमी की समझ मारता है," और वर्तमान सरकार अपनी समझ खो चुकी है। विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस तानाशाही के खिलाफ हर स्तर पर एकजुट होकर लड़ेंगे और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करेंगे ताकि मीडिया की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।