कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में ममता बनर्जी सरकार ने एक कड़ा प्रस्ताव पेश करते हुए दावा किया कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के कारण पैदा हुए मानसिक तनाव और घबराहट की वजह से राज्य में अब तक 107 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने नियम 169 के तहत यह प्रस्ताव रखते हुए भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) की तीखी आलोचना की और इसे 'परेशान करने वाला आयोग' करार दिया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने इस पर विस्तृत चर्चा को यह कहते हुए टाल दिया कि मामला फिलहाल Supreme Court में लंबित है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जा रही यह प्रक्रिया नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC का ही एक छिपा हुआ रूप है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में बयान दिया था कि बंगाल में हर दिन 3-4 लोग इस डर से अपनी जान गंवा रहे हैं कि मतदाता सूची से नाम कटने के बाद उन्हें अवैध घोषित कर दिया जाएगा। बुधवार को ममता बनर्जी खुद देश की पहली ऐसी सिटिंग सीएम बनीं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें रखीं और बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे टीएमसी की 'डर फैलाने वाली राजनीति' बताया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सरकार जानबूझकर सामान्य मौतों को राजनीतिक रंग दे रही है ताकि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा का तर्क है कि एसआईआर एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया है जिसे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।
वर्तमान में राज्य में स्थिति तनावपूर्ण है क्योंकि कई सीमावर्ती जिलों में लोग 1971 के पुराने दस्तावेज (Legacy Data) जुटाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया केवल फर्जी नामों को हटाने और पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए है, लेकिन राजनीतिक टकराव ने इसे 'पहचान के संकट' के रूप में तब्दील कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।