पेशावर: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में पिछले कई दिनों से जारी सैन्य अभियान अब समाप्त हो गया है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) ने बृहस्पतिवार, 5 फरवरी 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 'ऑपरेशन रद-उल-फितना-1' (Operation Radd-ul-Fitna-1) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस व्यापक कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने कुल 216 आतंकवादियों को मार गिराया है। हालांकि, इस संघर्ष की भारी कीमत आम नागरिकों और जवानों को भी चुकानी पड़ी है; सेना के अनुसार, अभियान के दौरान 36 निर्दोष नागरिक और 22 सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं।
यह सैन्य अभियान 26 जनवरी को बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में हुए भीषण आतंकी हमलों के जवाब में शुरू किया गया था। सेना ने पंजगुर और हरनाई (Harnai District) जैसे संवेदनशील इलाकों में खुफिया जानकारी के आधार पर सर्जिकल स्ट्राइक और जमीनी हमले किए। ISPR का दावा है कि इस कार्रवाई से आतंकवादी नेटवर्क के कमांड-एंड-कंट्रोल स्ट्रक्चर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। मारे गए आतंकवादियों में प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (Balochistan Liberation Army - BLA) के कई टॉप कमांडर शामिल बताए जा रहे हैं।
अभियान के दौरान सेना ने भारी मात्रा में विदेशी हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने एक बार फिर इन हमलों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाया है, जिसे भारत ने हमेशा की तरह सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA India) का कहना है कि बलूचिस्तान में हिंसा पाकिस्तान की अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का परिणाम है। इस बीच, हिंसा के चलते क्वेटा से चलने वाली ट्रेनों और इंटरनेट सेवाओं को सुरक्षा कारणों से निलंबित कर दिया गया था, जिन्हें अब धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है।
बलूचिस्तान का यह क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, यही कारण है कि यहां की अस्थिरता पाकिस्तान सरकार और सैन्य नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य सफलता के बावजूद, जब तक स्थानीय आबादी की शिकायतों और स्वायत्तता की मांगों का राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करना मुश्किल होगा।