लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि जहाँ अपराधियों के लिए 'बुलडोजर बाबा' की है, वहीं बच्चों के बीच वे एक बेहद कोमल और वात्सल्यपूर्ण अभिभावक के रूप में उभर कर सामने आए हैं। हाल के दिनों में लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक, मुख्यमंत्री के 'जनता दर्शन' कार्यक्रमों में कई ऐसे दृश्य देखने को मिले हैं, जहाँ सीएम ने नन्हे बच्चों की मासूम जिद को न केवल सुना, बल्कि उन पर तत्काल निर्णय लेकर उनके भविष्य को संवारने का काम किया। इसी कड़ी में लखनऊ की नन्ही अनाबी अली का किस्सा चर्चा में है, जिसने मुख्यमंत्री को कविता सुनाकर उनका दिल जीत लिया और सीएम ने तत्काल उसके स्कूल Admission के निर्देश जारी किए।
मुख्यमंत्री का यह ‘बाल स्नेह मॉडल’ केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के मोर्चे पर भी बच्चों और महिलाओं के लिए एक ढाल बन गया है। कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता, जो सीएम से मिलने के लिए पैदल लखनऊ पहुँच गई थी, को मुख्यमंत्री ने न केवल सहारा दिया बल्कि उसके चित्रों को स्वीकार कर उसे सुरक्षित भविष्य का आश्वासन भी दिया। इसी तरह, मेजर की बेटी अंजना भट्ट के मकान पर अवैध कब्जे की शिकायत पर सीएम ने महज 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजकर कानून के शासन (Rule of Law) का कड़ा संदेश दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के जरूरतमंद बच्चों के लिए त्वरित आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित की है। कानपुर की नन्ही मायरा, जो बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती है, और गोरखपुर की पंखुड़ी, जिसकी पढ़ाई फीस के अभाव में रुक गई थी, को सीएम ने निजी तौर पर संज्ञान लेकर स्कूलों में दाखिला दिलाया और उनकी आर्थिक बाधाओं को दूर किया। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए भी सीएम आवास के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं; हाल ही में एक कैंसर पीड़ित युवक को सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका मुफ्त इलाज शुरू कराया गया।
प्रशासनिक स्तर पर इन सभी मामलों की निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO Uttar Pradesh) द्वारा सीधे की जाती है। सीएम योगी का मानना है कि प्रदेश के 25 करोड़ नागरिक उनका परिवार हैं, और इस परिवार के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। गणतंत्र दिवस की परेड हो या मकर संक्रांति का उत्सव, मुख्यमंत्री का बच्चों के साथ सहज संवाद उनके 'सुशासन' और 'संवेदना' की एक अनूठी तस्वीर पेश करता है, जो अब उत्तर प्रदेश में एक नीतिगत मॉडल बन चुका है।