मिलावट का 'स्लो पॉइजन': राज्यसभा में राघव चड्ढा ने खोली पोल, बोले भारत में हर चौथा खाद्य सैंपल ज़हर के समान



नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने संसद में देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए मिलावटखोरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को सदन में बोलते हुए चड्ढा ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि देश की बड़ी कंपनियां 'हेल्थ' और 'एनर्जी' के नाम पर जनता को Slow Poison परोस रही हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे हमारी रसोई में इस्तेमाल होने वाले दूध में यूरिया, पनीर में कास्टिक सोडा, मसालों में ईंट का पाउडर और फलों के जूस में कैंसरकारी सिंथेटिक रंग मिलाए जा रहे हैं।

सांसद राघव चड्ढा ने एक डराने वाली रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए सदन को बताया कि भारत में बिकने वाले दूध के नमूनों में से 71% में यूरिया और 64% में सोडियम बाइकार्बोनेट जैसे खतरनाक न्यूट्रलाइजर पाए गए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक माँ अपने बच्चे को सेहत बनाने के लिए दूध पिलाती है, लेकिन अनजाने में वह उसे यूरिया और डिटर्जेंट दे रही है। चड्ढा ने सब्जियों को ताज़ा दिखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Oxytocin Injection पर भी चिंता जताई, जो बांझपन, हार्ट फेलियर और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन रहा है।

सदन में आंकड़ों की बाजीगरी पेश करते हुए उन्होंने बताया कि 2025-26 के बीच जांचे गए सैंपलों में से 25% मिलावटी पाए गए हैं, यानी हर चार में से एक खाद्य पदार्थ असुरक्षित है। उन्होंने दो प्रमुख भारतीय मसाला ब्रांडों का उदाहरण दिया जिन पर यूरोप और यूके में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशकों की वजह से बैन लगा दिया गया है, लेकिन वे भारत में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। चड्ढा ने तंज कसते हुए कहा कि जो चीजें विदेशों में जानवरों के लिए भी बैन हैं, उन्हें भारत में इंसानों को खिलाया जा रहा है।

राघव चड्ढा ने FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) को और अधिक कड़े अधिकार देने, प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने और मिलावट करने वाली कंपनियों पर भारी वित्तीय जुर्माने के साथ-साथ 'पब्लिक रिकॉल सिस्टम' लागू करने की मांग की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विज्ञापनों में किए जाने वाले गुमराह करने वाले Health Claims पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।



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