RBI का बड़ा कदम: भारत में जल्द आएंगे प्लास्टिक के नोट! ₹10 और ₹20 के नोटों से होगी शुरुआत, चीन-पाकिस्तान को लेकर रखी सख्त शर्त



नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की मौद्रिक प्रणाली में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव करने की तैयारी में है। आरबीआई की करेंसी छापने वाली सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने एक 'ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) जारी किया है। इस वैश्विक निविदा के जरिए दुनिया भर के निर्माताओं से भारतीय बैंकनोट छापने के लिए विशेष सुरक्षा विशेषताओं (Security Features) से लैस ओपेसिफाइड पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की सप्लाई के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी प्रायोगिक प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में कम मूल्यवर्ग के नोट, विशेष रूप से ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोट जारी किए जा सकते हैं, जिनका फुल-स्केल रोलआउट साल 2027 से शुरू होने की उम्मीद है।

इस ग्लोबल टेंडर के तहत कुल 68,000 रीम (अनुमानित मात्रा) पॉलीमर सबस्ट्रेट की मांग की गई है, जिसमें दो अलग-अलग मूल्यवर्गों के लिए 34,000-34,000 रीम शामिल होंगे (प्रत्येक रीम में 500 शीट)। इन प्लास्टिक नोटों में पोर्ट्रेट वाली साफ पारदर्शी खिड़की, मेटैलिक अंक, मैग्नेटिक स्यूडो थ्रेड और शैडो इमेज जैसे एडवांस सुरक्षा फीचर्स शामिल होंगे, जिससे नकली नोटों (Fake Currency) के कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सकेगी। कागजी नोटों की तुलना में प्लास्टिक के नोट अत्यधिक टिकाऊ होते हैं, जिन पर गंदगी और नमी का असर नहीं होता। हालांकि इनकी शुरुआती छपाई लागत अधिक होती है, लेकिन लंबी लाइफ होने के कारण यह बेहद किफायती साबित होते हैं। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि प्लास्टिक नोट आने के बाद भी पुराने कागजी नोट पूरी तरह से वैध मुद्रा (Legal Tender) बने रहेंगे और सिस्टम में समानांतर रूप से चलते रहेंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस ग्लोबल टेंडर में चीन और पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त शर्तें (Strict Conditions) जोड़ी गई हैं। बोली लगाने वाली कंपनियों को यह लिखित रूप में पक्का करना होगा कि इन दोनों देशों में उनका कामकाज भारत से जुड़े व्यापार से पूरी तरह अलग (फायरवॉल) हो, वे वहां से कोई कच्चा माल न लें और न ही ऐसे किसी कर्मचारी को नियुक्त करें जिसने चीन या पाकिस्तान में काम किया हो। इसके साथ ही, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए DPIIT के पास पंजीकृत होना अनिवार्य है। बोली लगाने के लिए निर्माताओं के पास किसी केंद्रीय बैंक को सप्लाई करने का न्यूनतम 3 साल का अनुभव होना चाहिए। साथ ही, उन्हें प्रयोगशाला परीक्षण के लिए पॉलीमर शीट के 10 ऐसे सैंपल सौंपने होंगे जो जानवरों की चर्बी या DNA Content से पूरी तरह मुक्त होने के लिए प्रमाणित हों। इस टेंडर में भाग लेने की अंतिम तिथि 18 अगस्त 2026 तय की गई है।


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