चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मशहूर गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को OTT Platforms से हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता शरवन सिंह की पात्रता (Locus Standi) पर कड़े सवाल उठाए। अदालत ने दो टूक शब्दों में पूछा कि जब याचिकाकर्ता फिल्म का निर्माता या निर्देशक नहीं है, तो किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा इस मामले में जनहित याचिका दायर करने का क्या औचित्य है? इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी अर्जी वापस लेने की अनुमति दे दी, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि वह अब फिल्म के निर्देशक के माध्यम से दोबारा अदालत का रुख करेंगे।
अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने इस याचिका का पुरजोर विरोध किया। सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता धीरज जैन ने दलील दी कि इस याचिका में जनहित का कोई भी तत्व शामिल नहीं है। गौरतलब है कि फिल्म ‘सतलुज’ को 5 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया गया था, जिसके बाद 8 जुलाई को सीधे हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है और इसे प्लेटफॉर्म से हटाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) तथा दर्शकों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब इस फिल्म के डिजिटल प्रसारण को लेकर कानूनी लड़ाई नया मोड़ ले सकती है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि वे फिल्म के मूल राइट्स धारकों और निर्देशक को साथ लेकर नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया शुरू करेंगे। वहीं, High Court के इस फैसले से साफ हो गया है कि बिना किसी प्रत्यक्ष जुड़ाव या वास्तविक जनहित के व्यावसायिक फिल्मों से जुड़े विवादों में तीसरे पक्ष की याचिकाओं को अदालतें स्वीकार नहीं करेंगी।