तिहाड़-रोहिणी जेल उगाही कांड: कैदियों के परिजनों से वसूली का बड़ा खेल, एसीबी की जांच में मनी ट्रेल और यूपीआई नेटवर्क का खुलासा



नई दिल्ली: देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ और रोहिणी जेल में कैदियों के जरिए चलने वाले एक बहुत बड़े रिश्वतखोरी और अवैध उगाही नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की तफ्तीश में जेल प्रशासन को हिलाकर रख देने वाले चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जेल के भीतर कैदियों को वीआईपी सुविधाएं, सुरक्षा और मनचाही राहत दिलाने के नाम पर एक बेहद सुनियोजित रैकेट चलाया जा रहा था। इस मामले में एसीबी ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों और बैंक ट्रांजैक्शन की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

एसीबी की जांच में यह बात सामने आई है कि जेल के वार्डर और निचले स्तर के कर्मचारी पहले अमीर या रसूखदार अंडरट्रायल कैदियों को चिह्नित करते थे। इसके बाद उन कैदियों के जरिए उनके परिजनों पर मोटी रकम देने का दबाव बनाया जाता था। इस अवैध लेन-देन के लिए आरोपी कर्मचारियों द्वारा कैदियों को विशेष बैंक खाता संख्या या UPI ID उपलब्ध कराई जाती थी। जब भी कैदी अपने परिवार से फोन (मुलाकात जंगले) पर बात करते थे, तो वे चुपके से यह नंबर उन्हें नोट करा देते थे। इसके बाद कैदियों के परिजन बताए गए खातों में ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर देते थे, जिसे बाद में इस रैकेट में शामिल कर्मचारियों और बिचौलियों में आपस में बांट दिया जाता था।

इस पूरे मामले पर तिहाड़ जेल के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि जेलों में इस तरह का उगाही तंत्र काफी पुराना है, जिसमें अक्सर वरिष्ठ अधिकारी सीधे सामने न आकर निचले स्तर के कर्मियों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं। कई बार कर्मचारी कैदियों के घरों तक जाकर Cash (नकद राशि) भी वसूलते रहे हैं। फिलहाल, एसीबी का पूरा ध्यान इस रैकेट की मनी ट्रेल (वित्तीय कड़ियों) को खंगालने पर है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस उगाही का पैसा किन-किन बड़े अधिकारियों तक पहुंचता था। वहीं, इसी जांच के समानांतर एसीबी ने एक अन्य कार्रवाई में पशुपालन विभाग के एक अधिकारी को भी ₹3,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा है।



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