रेलवे का बड़ा फैसला: अब बॉडीकैम से लैस होंगे टीटीई, यात्रियों से विवाद और जबरन वसूली के आरोपों पर लगेगी लगाम



लखनऊ (उत्तर प्रदेश): ट्रेनों में सफर के दौरान बर्थ आवंटन को लेकर होने वाले विवादों और चेकिंग स्टाफ पर लगने वाले अवैध लेन-देन के आरोपों को खत्म करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक बेहद तकनीकी और पारदर्शी कदम उठाया है। अब चलती ट्रेनों में टिकट चेक करने वाले टीटीई (TTE) अनिवार्य रूप से 'बॉडीकैम' (शरीर पर लगने वाले कैमरे) से लैस नजर आएंगे। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में मई-जून में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफल शुरुआत के बाद, अब उत्तर पूर्व रेलवे (NER) के तीनों मंडलों और उत्तर रेलवे (NR) के चेकिंग स्टाफ को भी जल्द ही ये अत्याधुनिक कैमरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस नई व्यवस्था से जहां बिना गलती के कार्रवाई की जद में आने वाले रेल कर्मचारियों को सुरक्षा मिलेगी, वहीं यात्रियों की सही शिकायतों पर त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।

इस नई तकनीक की मांग लंबे समय से इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ एसोसिएशन द्वारा की जा रही थी, जिस पर रेलवे बोर्ड ने अब अपनी मुहर लगा दी है। टीटीई के ड्यूटी पर रहते समय यह कैमरा हर गतिविधि और बातचीत को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करेगा, जिससे किसी भी विवाद की स्थिति में फुटेज देखकर दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सकेगा। पहले चरण में चेकिंग स्टाफ को कवर करने के बाद, रेलवे प्रशासन ने दूसरे फेज में बुकिंग काउंटरों पर तैनात क्लर्कों को भी इस दायरे में लाने की तैयारी की है। अक्सर बुकिंग काउंटरों पर यात्रियों से फुटकर (चेंज) के नाम पर ज्यादा पैसे रखने या कम टिकट देने के आरोप लगते रहे हैं, जिस पर अब Indian Railways का यह डिजिटल पहरा पूरी तरह से नकेल कसेगा।

रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल रेल संचालन और राजस्व संग्रह में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम यात्रियों के बीच सुरक्षा और भरोसे का माहौल भी मजबूत होगा। डिजिटल साक्ष्यों की मदद से जांच प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी और झूठी शिकायतों के मामलों में भी कमी आएगी। इस Bodycam Initiative को रेलवे के आधुनिकीकरण और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।


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